पटना। विविधता और एकता के संबंधों को मजबूती प्रदान करने उद्देश्य से भारत सरकार के एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत युवा संगम के तीसरे चरण में बिहार और गुजरात के नोडल संस्थानों के बीच एक महत्वपूर्ण आदान-प्रदान हुआ है। बिहार के नोडल संस्थान आईआईएम बोध गया में गुजरात के 42 विद्यार्थियों और 4 प्रोफेसरों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ये विद्यार्थी एवं प्रोफेसर गुजरात के नोडल संस्थान आईआईटी सूरत से आए थे। सांस्कृतिक विनिमय एवं राष्ट्रीय एकता के सफर में यह एक अहम अध्याय लिखा गया है। विद्यार्थियों के इस प्रतिनिधिमंडल ने बिहार संग्रहालय से अपनी सांस्कृति यात्रा आरंभ की जो इस प्रदेश की ऐतिहासिक समृद्धि का प्रतीक है। यह संग्रहालय कलाकृतियों के व्यापक संग्रह के लिए प्रख्यात है जिनकी शुरुआत हड़प्पा काल से होती है। यह संग्रहालय बिहार के अतीत की गहन जानकारी प्रस्तुत करता है। यहां विभिन्न राजवंशों की निशानियां प्रदर्शित हैं जिन्होंने कभी बिहार पर राज किया था, ये यादगारें पाटलीपुत्र के परिवर्तित होकर वर्तमान बिहार बनने की कहानी बयां करती हैं। युवा संगम का लक्ष्य है विद्यार्थियों को पांच व्यापक क्षेत्रों की बहुआयामी जानकारी प्रदान करनाः पर्यटन, परम्परा, प्रगति, परस्पर सम्पर्क और प्रौद्योगिकी। बिहार की यह ज्ञानवर्धक यात्रा इसी सोच का अनुसरण है, विद्यार्थियों को राज्य की प्रत्यक्ष जानकारी मिली और वे यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व ऐतिहासिक महत्व के गवाह बने। तत्पश्चात्, विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल को बिहार के महामहीम राज्यपाल श्री राजेन्द्र अर्लेकर से भेंट का अवसर मिला। विद्यार्थियों और राज्यपाल के मध्य जानकारीपूर्ण प्रश्नोत्तर का दौरा चला। इस मुलाकात में उन्होंने बिहार की श्रमशक्ति में महिलाओं की भूमिका तथा बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बातचीत की। इस प्रतिनिधिमंडल के एक प्रोफेसर ने स्व-रचित पुस्तक भी राज्यपाल को भेंट की। युवा संगम की तीसरा चरण इस बात का परिचायक है कि भारत सरकार विविधता में एकता को पोषित करने को प्रतिबद्ध है। विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच अर्थपूर्ण सम्पर्क-संवाद और विनिमय को सुगम करके यह कार्यक्रम सांस्कृतिक सराहना एवं समझ के लिए मंच तैयार करता है। जब ये विद्यार्थी अपने-अपने संस्थानों को लौटेंगे तो वे अपने साथ न केवल सांस्कृतिक तल्लीनता की यादें लेकर जाएंगे बल्कि उस तानेबाने की गहरी समझ लेकर भी जाएंगे जो हमारे राष्ट्र को एकजुट करता है। इस दुनिया में अक्सर अंतर पर बल दिया जाता है, लेकिन युवा संगम की तीसरा चरण इस बात का चमकता उदाहरण है कि किस तरह साझे अनुभव एवं सांस्कृतिक विनिमय सौहार्दपूर्ण और एकजुट भारत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इसी प्रकार की पहलों द्वारा एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को जीवंत बनाया जा रहा है और हमारी साझी विरासत में अपनेपन एवं गौरव की भावना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गुजरात से आए युवा संगम विद्यार्थियों ने जाना बिहार की संस्कृति को
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